भोपाल। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री के काम को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। पटवारियों द्वारा योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री का काम करने से इनकार किए जाने के बाद मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे सरकार के आदेश के अनुसार पटवारियों से रजिस्ट्री का काम कराएं और निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी करवाना सुनिश्चित करें। साथ ही आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पटवारियों के इनकार के बाद सरकार का सख्त रुख
स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री के काम को लेकर पटवारियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी। पटवारियों के स्तर से रजिस्ट्री का काम करने से इनकार किए जाने के बाद यह मामला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया था। अब सरकार ने सीधे कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में सरकारी आदेश का पालन सुनिश्चित करें।
मुख्य सचिव के निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों को केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि मौके पर काम शुरू होने और निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी होने की निगरानी भी करनी होगी। इस व्यवस्था के जरिए सरकार स्वामित्व योजना से जुड़े रजिस्ट्री कार्य को गति देना चाहती है।
बुधवार तक काम शुरू नहीं हुआ तो कार्रवाई
सरकार की ओर से कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं। निर्देशों के मुताबिक यदि संबंधित अधिकारी बुधवार तक काम शुरू नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के बाद जिला स्तर पर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी समय पर अपनी जिम्मेदारी संभालें।
सरकार का संदेश यह है कि निर्धारित आदेशों की अनदेखी को सामान्य प्रशासनिक देरी के रूप में नहीं देखा जाएगा। यदि अधिकारी या कर्मचारी सरकार के निर्देश के अनुरूप कार्य नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किस अधिकारी या कर्मचारी पर किस प्रकार की कार्रवाई होगी, इसका फैसला संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों के अनुसार किया जाएगा।
क्या है स्वामित्व योजना?
स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर लोगों के संपत्ति अधिकारों से संबंधित दस्तावेजीकरण को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्तियों का सर्वेक्षण और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाता है। संपत्ति से संबंधित अधिकारों के दस्तावेज उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति के संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
योजना का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट बनाना है। संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध होने से भविष्य में स्वामित्व से जुड़े विवादों को कम करने, संपत्ति का उपयोग आर्थिक गतिविधियों के लिए करने तथा सरकारी रिकॉर्ड को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।




