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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश की तबदला नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं। नीति में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कट-ऑफ अवधि और तैनाती के क्षेत्रों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
📌 मुख्य बिंदु: 31 मार्च रहेगी कट-ऑफ डेट
नई नीति के अनुसार, स्थानांतरण के लिए ‘तीन साल’ और ‘सात साल’ की गणना के लिए 31 मार्च को कट-ऑफ अवधि माना जाएगा।
श्रेणीवार तबादला नियम एक नजर में:
| श्रेणी | तैनाती के नियम |
| समूह ‘क’ (Group A) | अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। |
| मंडल स्तरीय पद | समूह ‘क’ के वे अधिकारी जिनके पद केवल मंडल स्तर पर हैं, उन्हें उनके गृह मंडल में तैनाती नहीं मिलेगी। |
| समूह ‘ख’ (Group B) | इन अधिकारियों को भी उनके गृह मंडल में तैनात नहीं किया जाएगा (यह नियम केवल जिलास्तरीय कार्यालयों पर लागू होगा)। |
| समूह ‘ग’ (Group C) | इस श्रेणी के सभी कार्मिकों का पटल (Seat) और क्षेत्र परिवर्तन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। |

विशेष परिस्थितियों के लिए निर्देश
शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विभाग का जिले में कोई अन्य कार्यालय उपलब्ध नहीं है, तो ऐसी स्थिति में कार्मिक के पटल या क्षेत्र का बदलाव 13 मई 2022 को जारी किए गए शासनादेश के आधार पर ही किया जाएगा।

क्यों अहम है यह नीति?
- भ्रष्टाचार पर रोक: पटल और क्षेत्र परिवर्तन से विभागों में पारदर्शिता आएगी।
- निष्पक्षता: गृह जिलों और मंडलों में तैनाती न होने से प्रशासनिक कार्यों में स्थानीय प्रभाव कम होगा।
- समय सीमा: कट-ऑफ डेट निर्धारित होने से तबादलों की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।
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