drnewsindia.com /इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करने के आरोपों को लेकर चर्चा में आईं कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को अदालत से बड़ा झटका लगा है। स्थानीय अदालत ने उनकी गिरफ्तारी से पहले जमानत (अग्रिम जमानत) की याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
बजट बैठक के दौरान हुआ था विवाद

जानकारी के अनुसार, यह मामला 8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम की बजट बैठक के दौरान सामने आया था। आरोप है कि बैठक की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ गान के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने इसे गाने से इनकार कर दिया था। इस घटना के बाद नगर निगम की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया और मामला पुलिस तक पहुंच गया।
राजनीतिक विवाद के बीच दर्ज हुआ मामला

घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। आरोप है कि पार्षद ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम’ गाने में हिस्सा नहीं लिया, जबकि विरोधी पक्ष ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया।
फौजिया शेख ने आरोपों को बताया गलत

अग्रिम जमानत याचिका में फौजिया शेख की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने कभी भी ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार नहीं किया। उनका दावा था कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने अदालत से गिरफ्तारी से संरक्षण देने की मांग की थी।
अदालत ने खारिज की याचिका

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्थानीय अदालत ने फौजिया शेख की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले के बाद अब पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
राजनीति में फिर गरमाया मुद्दा

अदालत के फैसले के बाद ‘वंदे मातरम’ विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रसम्मान से जुड़ा मामला बताया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
आगे क्या?
फौजिया शेख के पास अब उच्च अदालत में राहत की मांग करने का विकल्प मौजूद है। वहीं पुलिस मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटी हुई है।




