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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली व पेपर लीक के विरोध में आंदोलनरत अभ्यर्थियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने अब राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय (High Court) के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें सीआईडी (CID) की मौजूदा जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- प्रमुख मांग: राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की कमेटी से जांच और सीबीआई (CBI) प्रोब।
- अनिश्चितकालीन धरना: रांची में 29 जुलाई से अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी।
- भूख हड़ताल: केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग को लेकर एक छात्र नेता रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर।
- विधानसभा घेराव की चेतावनी: मांगें पूरी न होने पर 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा मार्च का अल्टीमेटम।

1. CID जांच को ‘मामला दबाने की कोशिश’ बताया
रांची में 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले को सीआईडी को सौंपकर केवल लीपापोती (Whitewash) करने की कोशिश कर रही है।
- आरोप: छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- CBI जांच की मांग: अभ्यर्थियों ने दोहराया कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केवल सीबीआई (CBI) जांच ही एकमात्र समाधान है।
2. छात्र आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन, भूख हड़ताल जारी
इस आंदोलन को राज्य के विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है:
- भूख हड़ताल: मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से जांच की मांग को लेकर एक छात्र नेता रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हुआ है।
- तनावपूर्ण माहौल: अभ्यर्थियों के अडिग रुख से प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

3. 10 अगस्त को ‘विधानसभा मार्च’ की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इसके तहत अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को झारखंड राज्य विधानसभा के घेराव/मार्च का ऐलान किया है।




