भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई। इसके लिए 1,14,365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में योजना के तहत करीब 1.27 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी जा रही है।
सरकार के अनुसार जून 2023 से जुलाई 2026 तक 38 किस्तों में 63,248 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
लाड़ली लक्ष्मी योजना भी जारी रहेगी
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए 16,326.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना से अब तक करीब 50.99 लाख बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। योजना का उद्देश्य बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ाना, लिंग अनुपात में सुधार तथा बालिकाओं के शिक्षा और स्वास्थ्य स्तर में सुधार करना है।

नर्मदा संरक्षण के लिए बनेगा नमन मिशन
कैबिनेट ने नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन प्रबंधन के लिए नर्मदा नमन (नमन) मिशन के गठन को भी मंजूरी दी। इसके लिए हर साल 200 करोड़ रुपये का प्रावधान रहेगा। राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये अनुदान देगी और इतनी ही राशि कैंपा निधि से उपलब्ध कराई जाएगी।
मिशन के तहत नदी के स्वास्थ्य का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसमें AI, डेटा एनालिटिक्स, GIS, रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा। मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे।
71 हजार आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन
प्रदेश की करीब 71 हजार आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का निर्णय भी लिया गया है। ये कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, टीबी, मलेरिया और कुपोषण सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी और सेवाएं घर-घर पहुंचाती हैं। पांच वर्ष में इस पर 3,354 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अन्य फैसले भी हुए
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए पांच वर्ष के लिए 2,137.65 करोड़ रुपये मंजूर किए। प्रथम प्रसव पर 5,000 रुपये और द्वितीय प्रसव में बालिका जन्म पर 6,000 रुपये देने का प्रावधान है। इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि अधोसंरचना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, GIS और नवाचार से जुड़ी योजनाओं के लिए भी राशि स्वीकृत की गई।





