drnewsindia.com/सीहोर। जमीन के कारोबार में मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों की जिंदगीभर की कमाई लूटने का कथित खेल अब सीहोर में बड़े जमीन घोटाले के रूप में सामने आया है। यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने का सपना दिखाकर निवेशकों को सस्ती जमीन का लालच दिया गया और फिर एक ही जमीन के कई-कई सौदे कर लाखों रुपये के बयाने वसूल लिए गए। आरोपों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जमीन की रजिस्ट्री और अनुबंध के लिए कथित तौर पर नकली पिता तक खड़े किए गए। कहीं असली माता-पिता को छिपाने तो कहीं फर्जी पहचान के सहारे दस्तावेज तैयार कराने के आरोप हैं। सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार से 25 लाख रुपये की ठगी सहित कई पीड़ितों से डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक की धोखाधड़ी की शिकायत सामने आई है। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच के बाद एक-दो दिन में एफआईआर दर्ज करने की बात कही है।
2000 एकड़ का औद्योगिक हब बताकर बुना ठगी का जाल
पीड़ितों के अनुसार गिरोह का पूरा खेल औद्योगिक विकास की संभावनाओं के इर्द-गिर्द बुना गया। निवेशकों को बताया जाता था कि सीहोर में करीब 2000 एकड़ का नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने वाला है। इसके आसपास जमीन खरीदने वालों को आने वाले समय में कई गुना मुनाफा होगा। इसी भविष्य के सपने को दिखाकर इंदौर और भोपाल के व्यापारियों को जमीन खरीदने के लिए तैयार किया जाता था। निवेशकों को यह भी भरोसा दिलाया जाता था कि बाजार भाव से काफी कम कीमत पर जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
तीन करोड़ की जमीन 80-85 लाख में दिलाने का दावा
सस्ते सौदे का लालच इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार था। पीड़ितों के मुताबिक, जिस जमीन का बाजार मूल्य करीब तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ बताया जा रहा था, उसे महज 80 से 85 लाख रुपये प्रति एकड़ में दिलाने का दावा किया जाता था। इतनी बड़ी कीमत का अंतर देखकर निवेशक जल्दबाजी में सौदा तय कर लेते थे। इसके बाद बयाने के नाम पर 25 लाख, 30 लाख और 40 लाख रुपये तक की रकम वसूलने के आरोप हैं।
एक जमीन के सात से आठ खरीदार,
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पीड़ितों का आरोप है कि जिस जमीन को उन्हें दिखाकर सौदा किया गया, उसी जमीन का पहले से कई अन्य लोगों के साथ भी अनुबंध किया जा चुका था। एक ही संपत्ति के सात से आठ खरीदार होने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि जब एक जमीन के इतने सौदे किए जा रहे थे, तब खरीदारों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? जमीन के दस्तावेजों और पूर्व अनुबंधों की जांच से ही इस कथित नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।
रिटायर्ड सूबेदार से 25 लाख रुपये हड़पने का आरोप
इस धोखाधड़ी के शिकार लोगों में भारतीय सेना से करीब 30 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए सूबेदार एच.एन. यादव भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रसूलिया भानपुर क्षेत्र में जमीन खरीदने के सिलसिले में उनकी मुलाकात जमीन के ब्रोकरों और कथित किसानों से हुई थी। बातचीत के बाद जमीन का सौदा तय हुआ और उनसे 25 लाख रुपये लेकर अनुबंध भी किया गया। बाद में जब उन्होंने जमीन के दस्तावेजों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि उसी जमीन के लिए पहले से सात से आठ अन्य लोगों के साथ भी सौदे किए जा चुके हैं। यह जानकारी मिलने के बाद उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
पांच हजार रुपये में नकली पिता खड़ा करने का सनसनीखेज आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप फर्जी दस्तावेज और पहचान से जुड़ा है। पीड़ितों का दावा है कि जमीन के सौदों को अंजाम देने के लिए असली माता-पिता की जगह दूसरे व्यक्तियों को खड़ा किया गया। यहां तक कि एक पूर्व सरपंच को कथित तौर पर पांच से दस हजार रुपये देकर नकली पिता के रूप में पेश करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ितों के अनुसार, इस तरह के फर्जीवाड़े के जरिए रजिस्ट्री और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल जमीन की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि दस्तावेजों और पहचान के कथित दुरुपयोग का भी गंभीर मामला होगा।
लकवाग्रस्त पिता के बैंक खाते से आरटीजीएस कराने का आरोप
कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे के अनुसार जांच में यादव परिवार के कुछ लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। आरोप है कि एक व्यक्ति अपने लकवाग्रस्त पिता के बैंक खाते का इस्तेमाल कर रकम आरटीजीएस के माध्यम से प्राप्त करता था। इसके अलावा फर्जी व्यक्तियों को खड़ा कर जमीन के अनुबंध कराने की शिकायत भी सामने आई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किन खातों में कितनी रकम पहुंची और जमीन के सौदों में किन लोगों की भूमिका रही।
जमीन मालिकों से लेकर दलालों तक पर उठे सवाल
पीड़ितों ने अपनी शिकायत में नारायण सिंह, बंसीलाल, सुनील यादव, संजू यादव सहित इरफान खान, सोहेल खान, सुल्तान खान और अलीम खान जैसे लोगों के नामों का उल्लेख किया है। अन्य शिकायतकर्ताओं ने सुनील यादव, संजय यादव, सोहिल खान, सुल्तान खान और इंदौर के संजय शिवहरे सहित कुछ अन्य लोगों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। भोपाल की एक महिला सहित कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी संदेह के दायरे में बताई गई है। हालांकि इन सभी की भूमिका और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
50-60 लाख नहीं, डेढ़ से दो करोड़ तक पहुंचा ठगी का आंकड़ा
शुरुआत में इस मामले को कुछ खरीदारों से 50 से 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अब तक सामने आए मामलों में ठगी की रकम डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इंदौर निवासी पूनमचंद पटेल और उनके साथियों सहित चार से पांच फरियादियों ने पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखी है। पीड़ितों का कहना है कि कई लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई जमीन में निवेश करने के लिए दी थी लेकिन अब न जमीन मिल रही है और न ही रकम वापस की जा रही है।
एक-दो दिन में दर्ज होगी एफआईआर
मामले में कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने बताया कि इंदौर निवासी एसएन यादव, पूनमचंद राठौर सहित चार से पांच फरियादियों की शिकायत प्राप्त हुई है। आरोप है कि एक ही जमीन का कई लोगों से सौदा कर बयाने की रकम ली गई। पुलिस ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। टीआई के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और एक-दो दिन में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।




