भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए शुरू किया गया ‘हमारे शिक्षक’ ऐप अब विवादों में है। प्रदेश के कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि स्कूल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद ऐप हाजिरी दर्ज नहीं कर रहा। तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों को बार-बार अलग-अलग त्रुटि संदेश मिल रहे हैं, जिससे वेतन कटौती और कार्रवाई का डर बना हुआ है।
ऐप दे रहा अजीबोगरीब संदेश
हाजिरी लगाने के दौरान ऐप कभी “कृपया अपना सिर ऊपर करें”, “कृपया मुस्कुराएं”, “चेहरा नहीं मिला, पुनः प्रयास करें” जैसे संदेश दिखा रहा है। कई मामलों में ऐप शिक्षकों को स्कूल में मौजूद होने के बावजूद 2.6 से 4.7 किलोमीटर दूर बता रहा है और चेक-इन स्वीकार नहीं कर रहा।
स्कूल में मौजूद, फिर भी हाजिरी रिजेक्ट
बरखेड़ा कुर्मी स्कूल में एक शिक्षक की पहचान सत्यापित होने के बाद भी ऐप ने उन्हें 4.394 किलोमीटर दूर दिखाकर चेक-इन अस्वीकार कर दिया। वहीं माध्यमिक स्कूल पटारिया सीधा में भी शिक्षक को कई बार प्रयास करने के बावजूद “पुनः प्रयास करें” और “कृपया अपना सिर ऊपर करें” जैसे संदेश मिलते रहे।
जियो-फेंसिंग पर उठे सवाल
विभाग का दावा था कि ऐप जीपीएस और जियो-फेंसिंग तकनीक पर आधारित है, जिससे स्कूल के बाहर से उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकेगी। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि स्कूल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद ऐप सही लोकेशन नहीं पकड़ रहा और फेस वेरिफिकेशन सफल होने के बाद भी उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही।

वेतन कटौती और नौकरी का खतरा
शिक्षकों का कहना है कि ऐप पर चेक-इन और चेक-आउट नहीं होने पर ‘नो वर्क, नो पे’ के तहत वेतन काटा जा सकता है। वहीं अतिथि शिक्षकों के लिए 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होने से उनकी नौकरी पर भी संकट खड़ा हो गया है। समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी है।
छुट्टी और मॉनिटरिंग व्यवस्था भी प्रभावित
मेडिकल अवकाश, सामान्य अवकाश और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी इसी ऐप से संचालित होती हैं। ऐप का डेटा सार्थक ऐप और एम-शिक्षामित्र से जुड़ा होने के कारण तकनीकी गड़बड़ी का असर पूरी मॉनिटरिंग व्यवस्था पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
शिक्षकों ने उठाई ये मांग
शिक्षकों ने मांग की है कि जब तक ऐप की तकनीकी खामियां पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक ‘नो वर्क, नो पे’ के तहत वेतन कटौती और कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही उपस्थिति दर्ज करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि तकनीकी त्रुटियों का खामियाजा शिक्षकों को न भुगतना पड़े।





