भोपाल नहीं पहुंच सके किसान: बैरिकेडिंग और सख्त चेकिंग से लौटाए गए वाहन, आमजन भी हुए परेशान

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drnewsindia.com

भैरुंदा | मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए निकले किसानों को प्रशासन की सख्ती का सामना करना पड़ा। सीहोर जिले के भैरुंदा क्षेत्र सहित कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की सघन जांच की गई और किसानों को भोपाल जाने से रोक दिया गया। इस कार्रवाई का असर आम लोगों पर भी पड़ा, जिन्हें वैकल्पिक मार्गों से सफर करना पड़ा।

प्रशासन ने बुधवार सुबह से ही भोपाल जाने वाले प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी कर दी थी। ग्राम नंदगांव स्थित अंबर नदी पुल पर बैरिकेडिंग लगाकर हर वाहन की गहन जांच की गई। जांच के दौरान वाहनों के नंबर, यात्रियों के नाम, पता और मोबाइल नंबर तक दर्ज किए गए। जांच पूरी होने के बाद कई वाहनों को वापस लौटा दिया गया।

अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान

पूरे अभियान की निगरानी एसडीएम सुधीर कुशवाह, एसडीओपी रोशन कुमार जैन, तहसीलदार सौरभ शर्मा, नायब तहसीलदार रामदास गोरले और थाना प्रभारी घनश्याम दांगी ने की। राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम पूरे दिन क्षेत्र में तैनात रही और हर आने-जाने वाले वाहन की जांच करती रही।

आम लोगों को भी हुई परेशानी

प्रशासन की सख्ती केवल किसानों तक सीमित नहीं रही। भोपाल, अबेदुलगंज, बुधनी और नर्मदापुरम जाने वाले आम नागरिकों को भी मुख्य मार्गों से जाने की अनुमति नहीं दी गई। कई लोगों को लंबा चक्कर लगाकर वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करनी पड़ी। भोपाल जाने वालों को सीहोर होकर जाने की सलाह दी गई, जबकि नर्मदापुरम जाने वाले लोगों को छिपानेर पुल और टिमरनी मार्ग का उपयोग करने के लिए कहा गया।

सोशल मीडिया के जरिए किया गया था आंदोलन का आह्वान

किसान संगठनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों से भोपाल पहुंचने और आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। किसान स्वराज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र जाट ने भी किसानों से आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया था। इसके बाद भैरुंदा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में किसान भोपाल जाने की तैयारी में थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।

भोपाल में जारी है किसानों का आंदोलन

इधर, भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

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