रक्षाबंधन से पहले चीनी की मिठास पड़ी कड़वी: रायसेन में मिठाई ₹40 तक महंगी; शक्कर ₹65 पार, उपभोक्ताओं पर पड़ेगा करोड़ों का अतिरिक्त भार

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drnewsindia.com / रायसेन। रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले चीनी (शक्कर) के बढ़ते दामों का सीधा असर अब मिठाइयों की कीमतों पर दिखने लगा है। रायसेन शहर में मिठाई विक्रेताओं ने पिछले तीन दिनों के भीतर मिठाइयों के भाव में ₹20 से ₹40 प्रति किलो तक का इजाफा कर दिया है। इससे इस बार रक्षाबंधन पर आम जनता का बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है।

💸 लागत बढ़ी तो महंगी हुईं मिठाइयां

महामाया चौक स्थित बीकानेर मिष्ठान भंडार के संचालक हनुमत राज सिंह पुरोहित ने बताया कि मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है:

  • लागत में भारी इजाफा: कमर्शियल गैस सिलेंडर, ड्राई फ्रूट्स और शक्कर के दाम बढ़ने से मिठाई निर्माण की लागत काफी बढ़ गई है।
  • परिवहन खर्च: भोपाल से मावा और अन्य कच्चा माल मंगाने पर ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी जुड़ रहा है।
  • मिठाइयों के भाव: जो मिठाई पहले ₹430 प्रति किलो बिक रही थी, अब उसके दाम बढ़कर करीब ₹500 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

📈 ₹72 तक पहुंचे थे शक्कर के दाम; अब ₹65 के आसपास

किराना व्यापारी उदय धाकड़ के अनुसार, पूर्व में ₹45 प्रति किलो बिकने वाली शक्कर पिछले दो दिनों में उछलकर ₹72 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।

  • वर्तमान स्थिति: मंगलवार को शक्कर की कीमत में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई और भाव करीब ₹65 प्रति किलो पर आया, लेकिन फिर भी यह सामान्य दिनों से काफी महंगा है।

🗳️ “सब इंतजाम हो रहा है, चिंता मत करिए” — शिवराज सिंह चौहान

सोमवार को रायसेन पहुंचे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से जब मीडिया ने शक्कर के तेजी से बढ़ते दामों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा:

“सब इंतजाम हो रहा है, चिंता मत करिए।”

📊 रायसेन जिले पर हर महीने पड़ेगा करोड़ों का अतिरिक्त भार

चीनी के बढ़ते दामों से रायसेन के उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा असर पड़ेगा:

विवरणशहर (रायसेन)पूरा जिला (रायसेन)
दैनिक/मासिक खपत4 से 5 टन प्रतिदिन1,000 से 1,500 टन प्रतिमाह
मासिक खपत (कुल)140 से 150 टन प्रतिमाह
पुराना मासिक खर्च₹5 से ₹6 करोड़
अनुमानित नया खर्च₹10 से ₹11 करोड़

त्योहारों के इस सीजन में चीनी के बढ़े हुए दामों के कारण पूरे रायसेन जिले के लोगों पर हर महीने ₹4 से ₹5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान है।

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