लखनऊ। खेती में मेहनत के साथ मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों की भी बड़ी भूमिका होती है। किसान अच्छी फसल के लिए बीज, खाद, सिंचाई और कृषि कार्यों पर खर्च करता है, लेकिन बेमौसम बारिश, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, जलभराव या दूसरी प्राकृतिक आपदाएं पूरी फसल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे जोखिमों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) संचालित की जा रही है। उत्तर प्रदेश में भी यह योजना लागू है और अधिसूचित फसलों को योजना में शामिल निर्धारित जोखिमों के विरुद्ध बीमा सुरक्षा दी जाती है। PMFBY के आधिकारिक पोर्टल पर राज्यवार किसान, बीमा क्षेत्र, प्रीमियम और दावों से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
2016-17 से उत्तर प्रदेश में लागू है योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश में वर्ष 2016-17 से लागू हुई और उत्तर प्रदेश भी इसके शुरुआती कार्यान्वयन वाले राज्यों में शामिल रहा। आधिकारिक PMFBY आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के लिए शुरुआती वर्षों से ही बीमित किसानों और आवेदनों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। उदाहरण के तौर पर खरीफ 2017 में उत्तर प्रदेश से करीब 24.92 लाख आवेदन दर्ज किए गए थे, जिनमें लगभग 24.85 लाख लोनी किसान और 7,574 गैर-लोनी किसान शामिल थे।
योजना का मूल उद्देश्य किसान को ऐसी परिस्थितियों में आर्थिक सहारा देना है, जब बीमित और अधिसूचित फसल को योजना में शामिल जोखिमों के कारण नुकसान होता है। इसका मतलब यह है कि किसान की फसल में नुकसान होने पर हर स्थिति में अपने आप भुगतान नहीं होता, बल्कि संबंधित फसल, क्षेत्र, जोखिम, अधिसूचना और योजना के नियमों के आधार पर दावा निर्धारित किया जाता है।
बुवाई न हो पाने पर भी प्रावधान
कई बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण किसान फसल की बुवाई या रोपाई समय पर नहीं कर पाता। ऐसी परिस्थितियों को भी योजना के निर्धारित नियमों के तहत बीमा कवरेज में शामिल किया जा सकता है। PMFBY के आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों में Prevented Sowing/Planting यानी बुवाई या रोपाई बाधित होने से संबंधित दावों के लिए प्रावधान मौजूद हैं।
इससे उन किसानों को भी एक निर्धारित सुरक्षा मिल सकती है, जिनके लिए मौसम की स्थिति ने खेती की शुरुआत में ही समस्या खड़ी कर दी हो। हालांकि दावा तभी बनता है जब संबंधित फसल और क्षेत्र योजना के तहत अधिसूचित हों और नुकसान निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो।
इस तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े कृषि जोखिमों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा तंत्र के रूप में काम करती है। हालांकि किसी भी किसान को योजना का लाभ उसकी फसल, क्षेत्र, अधिसूचना और नुकसान की निर्धारित पात्रता के अनुसार ही मिलता है। इसलिए बीमा लेने से पहले संबंधित सीजन की आधिकारिक अधिसूचना और नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।




