हैदराबाद। देशभर में गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ यह पर्व कई दिनों तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर निकलेंगे। अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार नदियों, तालाबों, झीलों, समुद्र तटों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। ऐसे में बड़े शहरों में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती रहती है।
24 ड्रोन और हजारों CCTV से निगरानी
हैदराबाद में गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने निगरानी के लिए 24 ड्रोन तैनात किए हैं। इनके माध्यम से जुलूसों, भीड़ की स्थिति और प्रमुख इलाकों पर ऊपर से नजर रखी जाएगी। ड्रोन से मिलने वाली जानकारी पुलिस को भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत के मुताबिक मौके पर कार्रवाई करने में मदद कर सकती है।
इसके अलावा शहर में करीब 10 हजार CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से हुसैन सागर झील के आसपास ऊंची इमारतों पर लगभग 100 अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं। ऊंचाई से निगरानी करने वाले इन कैमरों का इस्तेमाल भीड़ के बड़े समूहों और प्रमुख विसर्जन मार्गों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।
जुलूसों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन
गणेश विसर्जन के दौरान हैदराबाद की सड़कों पर बड़ी संख्या में जुलूस निकलेंगे। प्रतिमाओं को लेकर वाहन और पैदल श्रद्धालु निर्धारित मार्गों से विसर्जन स्थलों तक पहुंचेंगे। इसके कारण शहर के कई प्रमुख रास्तों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
इसी वजह से पुलिस ने जुलूसों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन और विभिन्न पाबंदियां लागू की हैं। विसर्जन मार्गों पर सामान्य वाहनों की आवाजाही को आवश्यकता के अनुसार बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले संबंधित ट्रैफिक एडवाइजरी की जानकारी लें और भीड़ वाले रास्तों के बजाय वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें।
ट्रैफिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल जुलूसों को रास्ता देना नहीं है, बल्कि एंबुलेंस, दमकल और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी जरूरी रास्ते खुले रखना है। बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आपातकालीन वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
लाखों प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर व्यापक तैयारी
गणेश उत्सव के अंतिम दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। कई स्थानों पर प्रशासन प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ-साथ कृत्रिम विसर्जन कुंड भी तैयार करता है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित और नियंत्रित स्थान उपलब्ध कराना तथा विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखना होता है।
हैदराबाद जैसे बड़े शहर में यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं जुलूस के रूप में निकलती हैं। कई जुलूसों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में पुलिस को एक साथ कई स्थानों पर भीड़, यातायात और कानून-व्यवस्था पर नजर रखनी होती है।
गणेश विसर्जन श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर होता है। कई दिनों तक पूजा-अर्चना और उत्सव के बाद भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित करते हुए अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के कारण प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
हैदराबाद में 25 से 30 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती, 24 ड्रोन, हजारों CCTV कैमरों, क्रेन, इमरजेंसी बोट, गोताखोरों और मेडिकल पोस्ट की व्यवस्था इसी व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा है। खासकर हुसैन सागर और प्रमुख जुलूस मार्गों पर निगरानी को प्राथमिकता दी गई है।
वहीं ट्रैफिक डायवर्जन और पाबंदियों के चलते आम वाहन चालकों को भी अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने की जरूरत होगी। सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य यही है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणेश विसर्जन में शामिल हो सकें और धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण तथा व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।




