मेनोपॉज के तीन चरण: पीरियड्स बंद होने से पहले महिलाओं के शरीर में दिखते हैं ये बदलाव, जानें जरूरी बातें

0
3

महिलाओं के जीवन में उम्र बढ़ने के साथ कई प्राकृतिक शारीरिक बदलाव आते हैं। इनमें मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति एक महत्वपूर्ण अवस्था है। यह महिला के प्रजनन जीवन के एक चरण के समाप्त होने का संकेत देती है। आमतौर पर मेनोपॉज की पहचान तब होती है, जब लगातार 12 महीने तक प्राकृतिक रूप से पीरियड्स नहीं आते और इसका कारण गर्भावस्था, किसी दवा, सर्जरी या अन्य चिकित्सकीय स्थिति से संबंधित नहीं होता। हालांकि, मेनोपॉज की प्रक्रिया केवल पीरियड्स बंद होने तक सीमित नहीं है। इससे पहले और बाद में भी शरीर में कई तरह के बदलाव हो सकते हैं।

मेनोपॉज क्या है और यह कब होता है?

मेनोपॉज वह प्राकृतिक अवस्था है, जब अंडाशय यानी ओवरीज की गतिविधि और हार्मोन उत्पादन में उम्र से संबंधित बदलावों के कारण मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव आता है। एस्ट्रोजन का प्रभाव केवल प्रजनन तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हड्डियों, योनि और मूत्र मार्ग के ऊतकों तथा शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्राकृतिक मेनोपॉज आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है, हालांकि इसका समय महिला के स्वास्थ्य, आनुवंशिक कारणों और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। लगभग 51 वर्ष इसकी सामान्य औसत आयु मानी जाती है। 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होना समयपूर्व मेनोपॉज की श्रेणी में आ सकता है, इसलिए ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

मेनोपॉज के तीन प्रमुख चरण

मेनोपॉज को समझने के लिए इसके तीन प्रमुख चरणों—पेरीमेनोपॉज, मेनोपॉज और पोस्टमेनोपॉज—के बारे में जानना जरूरी है। इन चरणों में हार्मोन का स्तर, मासिक धर्म और शारीरिक अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं।

1. पेरीमेनोपॉज: मेनोपॉज से पहले का बदलाव

पेरीमेनोपॉज वह संक्रमणकालीन चरण है, जिसमें अंडाशय के काम करने के तरीके में बदलाव शुरू होता है। इस दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कभी घट सकता है और कभी बढ़ सकता है। ओव्यूलेशन यानी अंडोत्सर्जन भी अनियमित होने लगता है। इसका असर मासिक धर्म के चक्र पर पड़ सकता है।

यह चरण अक्सर 40 वर्ष की उम्र के आसपास या उसके बाद शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में इसकी शुरुआत पहले या बाद में भी हो सकती है। इसकी अवधि हर महिला में समान नहीं होती। यह कई वर्षों तक चल सकता है, लेकिन सभी महिलाओं में इसका समय आठ से दस वर्ष होना जरूरी नहीं है।

2. मेनोपॉज: लगातार 12 महीने पीरियड्स न आना

मेनोपॉज किसी एक दिन अचानक होने वाली घटना की तरह महसूस हो सकता है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से इसकी पुष्टि एक निर्धारित अवधि के आधार पर की जाती है। जब किसी महिला को प्राकृतिक कारणों से लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म नहीं आता और इसका कोई दूसरा कारण नहीं मिलता, तब मेनोपॉज माना जाता है।

इस समय अंडाशय की हार्मोन बनाने की क्षमता काफी कम हो चुकी होती है। हालांकि, हर महिला में इसके लक्षणों की तीव्रता अलग होती है। कुछ महिलाओं को गर्मी की लहरें, रात में पसीना, नींद की परेशानी और मनोदशा में बदलाव महसूस हो सकते हैं। वहीं, कुछ महिलाओं में स्पष्ट लक्षण बहुत कम होते हैं।

3. पोस्टमेनोपॉज: मेनोपॉज के बाद का जीवन

पोस्टमेनोपॉज वह चरण है, जो मेनोपॉज की पुष्टि होने के बाद शुरू होता है और जीवन के आगे के वर्षों तक रहता है। इस दौरान मासिक धर्म सामान्य रूप से वापस नहीं आता। हार्मोन के कम स्तर का प्रभाव शरीर पर लंबे समय तक बना रह सकता है।

कुछ महिलाओं में गर्मी लगने और रात में पसीना आने जैसे लक्षण समय के साथ कम हो जाते हैं, जबकि अन्य में ये कई वर्षों तक जारी रह सकते हैं। एस्ट्रोजन की कमी के कारण योनि में सूखापन, यौन संबंध के दौरान असुविधा और पेशाब से जुड़ी कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं।

मेनोपॉज के दौरान कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

मेनोपॉज जीवन का प्राकृतिक चरण है, लेकिन कुछ लक्षणों में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। यदि पीरियड्स बहुत अधिक मात्रा में आएं, रक्तस्राव लंबे समय तक चले, पीरियड्स के बीच खून आए या संभोग के बाद रक्तस्राव हो, तो जांच करानी चाहिए। मेनोपॉज की पुष्टि के बाद किसी भी प्रकार का योनि से रक्तस्राव होने पर डॉक्टर से संपर्क करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

यदि 40 वर्ष से पहले पीरियड्स बंद होने लगें, लक्षण रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करें या नींद, मनोदशा और मूत्र संबंधी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना उचित है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर अन्य कारणों की जांच और लक्षणों के उपचार के विकल्प सुझा सकते हैं।

स्वस्थ रहने के लिए क्या करें?

मेनोपॉज के दौरान स्वस्थ दिनचर्या अपनाना लाभकारी हो सकता है। संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, फल, सब्जियां और कैल्शियम के अच्छे स्रोत शामिल हों। नियमित रूप से पैदल चलना, शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधियां करना हड्डियों तथा मांसपेशियों के स्वास्थ्य में मदद कर सकता है।

पर्याप्त नींद लें और सोने-जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। यदि गर्मी लगने या रात में पसीना आने की समस्या है, तो कमरे को ठंडा रखना और हल्के कपड़े पहनना राहत दे सकता है। कैफीन, शराब या मसालेदार भोजन से लक्षण बढ़ते हों, तो उनके सेवन पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

हार्मोन थेरेपी कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के परेशान करने वाले लक्षणों से राहत दे सकती है, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसका निर्णय महिला के लक्षणों, उम्र, चिकित्सा इतिहास और संभावित लाभ-जोखिम के आकलन के आधार पर डॉक्टर के साथ मिलकर किया जाना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के हार्मोन या अन्य दवाएं शुरू नहीं करनी चाहिए।

मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक बदलाव है, जिसे समझना और इसके संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। पेरीमेनोपॉज में हार्मोन और पीरियड्स में बदलाव शुरू हो सकते हैं, मेनोपॉज की पुष्टि लगातार 12 महीने मासिक धर्म न आने पर होती है और पोस्टमेनोपॉज में शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है।

हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। इसलिए लक्षणों की तुलना दूसरों से करने के बजाय अपने शरीर में होने वाले बदलावों को समझना, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहतर तरीका है। सही जानकारी और उचित देखभाल के साथ मेनोपॉज के इस चरण को अधिक सहजता से संभाला जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here