MP में UCC पर बड़ा सस्पेंस: मानसून सत्र में बिल आना मुश्किल, ड्राफ्ट कमेटी का कार्यकाल बढ़ा

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भोपाल (drnewsindia.com)। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। प्रदेश की मोहन यादव सरकार द्वारा विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश किए जाने की संभावनाएं अब बेहद कम दिखाई दे रही हैं। सरकार ने UCC का मसौदा (Draft) तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल आगे बढ़ा दिया है, जिससे इस सत्र में कानून बनने के कयासों पर फिलहाल ब्रेक लगता नजर आ रहा है।

🗓️ क्यों अटका मानसून सत्र में विधेयक?

सरकार द्वारा समिति का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद तकनीकी रूप से इस सत्र में बिल लाना मुश्किल हो गया है। इसके पीछे की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:

  • समिति का बढ़ा कार्यकाल: सरकार ने ड्राफ्ट कमेटी का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है।
  • सत्र की तारीखें: विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 24 जुलाई 2026 को ही समाप्त हो जाएगा।
  • आधिकारिक आदेश: विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 30 जून को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। समिति के सदस्य सचिव के अनुरोध और ड्राफ्ट की प्रगति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

📄 ‘गुजरात मॉडल’ पर आधारित है MP का UCC ड्राफ्ट

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में लागू होने वाला UCC कानून काफी हद तक गुजरात के मॉडल से मेल खाएगा।

  • अब तक तैयार किए गए ड्राफ्ट का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरात UCC के प्रावधानों पर आधारित है।
  • इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा (Custody) और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

❓ सीएम डॉ. मोहन यादव के बयान से सस्पेंस बरकरार

कमेटी का कार्यकाल बढ़ने के बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा अभी भी गर्म है कि सरकार कोई बड़ा कदम उठा सकती है।

  • मुख्यमंत्री का पिछला बयान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि जुलाई के मानसून सत्र के दौरान UCC कानून का रूप ले सकता है।
  • हाई-लेवल प्रेजेंटेशन: बीते 2 जुलाई को मुख्यमंत्री के सामने UCC ड्राफ्ट का एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया जा चुका है।

अधिकारियों का क्या कहना है? सचिवालय के सूत्रों और वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि भले ही समिति का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ाया गया है, लेकिन यदि सरकार चाहे तो ड्राफ्ट को समय से पहले अंतिम रूप देकर इसी सत्र में विधेयक लाने का एक अंतिम प्रयास कर सकती है।

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