MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून का हाहाकार; 40 से ज्यादा जिलों में झमाझम, आष्टा में दो बच्चों की मौत, कई हाईवे बंद

0
2

drnewsindia.com

भोपाल/सीहोर/खंडवा: मध्य प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे कई गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। मौसम विभाग ने इंदौर-उज्जैन समेत 19 जिलों में शनिवार को भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

🚨 बड़ी घटनाएं और नुकसान: आष्टा में मातम, उज्जैन में डूबे मंदिर

  • आष्टा (सीहोर): आष्टा क्षेत्र के बापचा दोनिया गांव में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां बाढ़ के पानी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। परिजन उन्हें आष्टा के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
  • सीहोर (अमलाहा-गोलूखेड़ी): यहाँ अजनाल नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है, जिससे इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। इसके अलावा आष्टा क्षेत्र में रात भर से जारी बारिश के कारण पार्वती, पपनास और नेवज नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। खाचरोद, मेहतवाड़ा, मैना, कोठरी, भंवरा जैसे कई गांवों के घरों और खेतों में पानी घुस गया है, जिससे सोयाबीन की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
  • उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी के घाट पर स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं। जगोटी गांव में पुलिया पार करते समय एक युवक बाइक सहित बह गया, जिसने पेड़ की टहनियां पकड़कर अपनी जान बचाई। वहीं, गांवड़ी लोढ़ा गांव से एक सहायक सचिव के बाइक समेत बहने की खबर है, जिनका शव शनिवार सुबह चंबल नदी से बरामद हुआ।
  • हरदा और खंडवा: हरदा में कालीमाचक नदी का पानी पुल से 3 फीट ऊपर बहने के कारण नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे बंद हो गया है। उधर खंडवा के किल्लौद ब्लॉक (ग्राम गरबड़ी) में उफनते नाले की वजह से खिरकिया मार्ग पूरी तरह बंद है और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

📊 पिछले 24 घंटों के प्रमुख बारिश आंकड़े (इंच में)

जिला/शहरबारिश की मात्रा
इंदौर2.5 इंच से ज्यादा
मंडला2.2 इंच
खंडवापौने 2 इंच
भोपाल1.5 इंच
दतिया, नौगांव, बालाघाटसवा 1 इंच
रतलाम, बैतूल, धार1.0 इंच
नर्मदापुरम, जबलपुर, उमरियापौन 1 इंच

📉 बारिश का गणित: कोटे से अब भी 13% कम

मौसम विभाग के अनुसार, इस सीजन में अब तक प्रदेश में कुल 135.3 मिमी (5.3 इंच) पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश (156.1 मिमी) से 13 प्रतिशत कम है। हालांकि, पश्चिमी हिस्से (जिसमें भोपाल, इंदौर, सीहोर शामिल हैं) में औसत से 8% ज्यादा पानी बरस चुका है, जबकि पूर्वी हिस्से में अभी 35% की कमी है।

जुलाई से बड़ी उम्मीदें: जून का महीना थोड़ा सूखा बीतने के बाद अब जुलाई से मौसम वैज्ञानिकों को काफी उम्मीदें हैं। प्रदेश की कुल सामान्य बारिश 37.3 इंच है, जिसका लगभग 40% हिस्सा अकेले जुलाई के महीने में ही बरस जाता है।

🏙️ बड़े शहरों के जुलाई रिकॉर्ड्स:

  • भोपाल: जुलाई में यहाँ औसतन 15 दिन बारिश होती है। भोपाल में साल 1986 में पूरे महीने में रिकॉर्ड 41 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
  • इंदौर: यहाँ जुलाई की औसत बारिश 12 इंच है। इंदौर में 27 जुलाई 1913 को 24 घंटे में रिकॉर्ड 11.5 इंच पानी गिरा था।
  • जबलपुर: पांचों बड़े शहरों में जबलपुर में जुलाई के दौरान सबसे ज्यादा (औसत 17 इंच) बारिश होती है।
  • ग्वालियर: अन्य शहरों की तुलना में ग्वालियर में कम बारिश होती है, यहाँ का जुलाई का औसत करीब 9 इंच है।

🌧️ आपके जिले का क्या है हाल? (कम/ज्यादा बारिश वाले जिले)

  • ज्यादा बारिश वाले प्रमुख जिले: सीहोर, भोपाल, इंदौर, देवास (सबसे ज्यादा 12 इंच), हरदा, बैतूल, खरगोन, मंदसौर और नीमच।
  • कम बारिश वाले प्रमुख जिले: जबलपुर, धार, उज्जैन, खंडवा, रीवा, सागर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, और छतरपुर।

प्रशासन की अपील: उफनते नदी-नालों और रपटों पर पानी होने की स्थिति में वाहन निकालने या उसे पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। जलभराव वाले निचले इलाकों पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

ताजातरीन और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारी वेबसाइट के साथ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here