drnewsindia.com/भोपाल | मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों नियुक्तियों का दौर जारी है। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल विस्तार की सुग़बुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर हुई समन्वय समिति की बैठक के बाद यह माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अपनी टीम में बड़ा फेरबदल कर सकती है।

मुख्य बिंदु: क्या होगा इस विस्तार में?
- नए चेहरों को मौका: वर्तमान में मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं, जबकि सीमा 35 की है। यानी 4 नए पद खाली हैं।
- परफॉर्मेन्स पर गाज: सूत्रों के अनुसार, करीब आधा दर्जन मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड खराब मिली है, जिन्हें हटाया जा सकता है।
- क्षेत्रीय समीकरण: मालवा, महाकौशल और बुंदेलखंड के नेताओं को इस बार प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
- मिशन 2028: यह विस्तार आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है ताकि जातीय संतुलन साधा जा सके।

📉 खराब रिपोर्ट कार्ड वाले मंत्रियों की होगी विदाई!
मोहन यादव सरकार के ढाई साल पूरे होने से पहले संगठन ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है। खबर है कि सत्ता और संगठन की रिपोर्ट में 6 मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके अलावा, उम्र के मापदंड के कारण भी एक वरिष्ठ मंत्री को आराम दिया जा सकता है।
इन दिग्गजों की हो सकती है वापसी
पिछली बार कई कद्दावर नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इस बार चर्चा है कि:
- गोपाल भार्गव: बुंदेलखंड के दिग्गज नेता और लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड।
- भूपेंद्र सिंह: सागर क्षेत्र का बड़ा चेहरा और पूर्व मंत्री।

दावेदारों की रेस में ये नाम सबसे आगे
मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए विधायकों की लंबी फेहरिस्त है, जिनमें प्रमुख नाम ये हैं:
- डॉ. राजेंद्र पांडेय (रतलाम)
- मालिनी गौड़ (इंदौर)
- मनोज पटेल (इंदौर)
- उषा ठाकुर (महू)
- अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर)
- रीति पाठक (सीधी)
- बृजेंद्र सिंह यादव (मुंगावली)
निगम-मंडलों में भी लगेगी ‘लॉटरी’
मंत्रिमंडल के साथ-साथ निगम-मंडलों में भी नियुक्तियों का काम तेज हो गया है। अगले कुछ दिनों में भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) सहित हाउसिंग बोर्ड और LUN जैसे बड़े निगमों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की तैनाती की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि नाराज विधायकों को साधने और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति है।




