नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से वीडियो कॉल पर बातचीत की और दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान के दौरान सामने आए गंभीर संकट में उनके साहस और सूझबूझ की सराहना की। अस्पताल से हुई इस बातचीत में कैप्टन मछार ने उस घटना के बारे में बताया, जिसमें उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट के भीतर उन पर हमला किया और विमान के नियंत्रण को लेकर बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो गई। घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
कॉकपिट में हमले के बाद तेजी से नीचे आया विमान
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और इसमें 170 से अधिक लोग सवार थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर उनके को-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया। इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा। फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, बोइंग 737 मैक्स 8 ने लगभग 29 से 30 सेकंड में करीब 14,000 फीट की ऊंचाई गंवाई।
घटना के दौरान विमान से आपातकालीन संकेत भी प्रसारित हुआ। स्थिति बिगड़ने के बाद उड़ान को उसके निर्धारित गंतव्य के बजाय सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद दोनों पायलटों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। कैप्टन मछार को बाद में इलाज के लिए अबू धाबी स्थानांतरित किया गया, जहां से उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से वीडियो कॉल पर बात की।
घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन मछार ने घटना के बेहद मुश्किल पलों को याद किया। अस्पताल के बिस्तर से बातचीत करते हुए वे भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि हमले में उन्हें कई चोटें आई थीं और वह कॉकपिट के अंदर नीचे गिर गए थे। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे जा रहा है और यदि उन्होंने कुछ नहीं किया तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।
मछार के मुताबिक, उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों को कॉकपिट तक पहुंचने का मौका मिला और हमलावर को काबू किया जा सका। इस घटनाक्रम ने विमान को पूरी तरह अनियंत्रित होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विमान के सुरक्षित तबुक पहुंचने के बाद यात्रियों को राहत मिली। कैप्टन मछार का उपचार अबू धाबी में चल रहा है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में हैं। भारत के यूएई स्थित राजदूत दीपक मित्तल ने भी उनके परिवार से मुलाकात कर भारतीय सरकार की ओर से समर्थन का भरोसा दिया था।
इस पूरी घटना में कैप्टन स्मित मछार के लंबे उड़ान अनुभव, संकट के दौरान लिए गए फैसले और विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में शामिल अन्य क्रू सदस्यों तथा यात्रियों की भूमिका सामने आई है। प्रधानमंत्री मोदी से उनकी बातचीत ने इस घटना को भारत में भी व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि हमले की पूरी परिस्थितियों और उसके कारणों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल कैप्टन मछार की स्थिति में सुधार और उनके जल्द स्वस्थ होने पर सभी की निगाहें टिकी हैं।




