अमेरिका भेज रहा तीसरा विमानवाहक पोत, ईरान तनाव के बीच मध्य पूर्व में 10 हजार तक अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका क्षेत्र में एक तीसरा विमानवाहक पोत और हजारों अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है। इस तैनाती में USS Theodore Roosevelt कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ अतिरिक्त मरीन बल भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इससे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त सैनिक जुड़ सकते हैं।

तीसरा विमानवाहक पोत क्यों भेजा जा रहा है?

रिपोर्टों के अनुसार, USS Theodore Roosevelt (CVN-71) ने 27 सितंबर को सैन डिएगो से अपनी यात्रा शुरू की। यह Carrier Strike Group 9 का प्रमुख विमानवाहक पोत है और इसके साथ Carrier Air Wing 11 भी तैनात है। अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, इसका संभावित मिशन अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में तैनाती और वहां पहले से मौजूद USS George Washington को राहत देना है।

Theodore Roosevelt के साथ अन्य नौसैनिक संसाधन भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा USS Makin Island Amphibious Ready Group भी सैन डिएगो से रवाना हुआ है। इस समूह में मरीन बल और उभयचर युद्धपोत शामिल हैं। Associated Press के अनुसार, इन जहाजों पर 7,000 से अधिक नाविक और करीब 2,000 मरीन हो सकते हैं।

इस तरह यह केवल एक विमानवाहक पोत की आवाजाही नहीं है, बल्कि अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स की संयुक्त तैनाती का हिस्सा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य क्षमता को बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग सैन्य विकल्प उपलब्ध रखना बताया जा रहा है।

ईरान के साथ तनाव के बीच बढ़ी सैन्य हलचल

अमेरिका की यह तैनाती ईरान के साथ बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हो रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत और संघर्षविराम से जुड़े प्रयासों के बीच सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने की संभावना जताई है। उन्होंने कहा है कि यदि कोई समझौता नहीं होता है तो नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है।

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का एक अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है। इसके अलावा Strait of Hormuz की स्थिति भी क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।

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