drnewsindia.com / नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने के फैसले का देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने स्वागत किया है। उद्योग जगत का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह कदम देश की आर्थिक रफ्तार को और तेज करेगा।
विकास को मिलेगी नई गति: सौरभ सान्याल
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने आरबीआई के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा:
“यह निर्णय देश की आर्थिक प्रगति को गति देने के साथ-साथ मुद्रास्फीति (महंगाई) को एक सुरक्षित दायरे में बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होगा। इससे उद्योग जगत को नई मजबूती मिलेगी।”

मुख्य बिंदु: क्यों खास है RBI का यह फैसला?
- स्थिरता का माहौल: ब्याज दरें स्थिर रहने से नए निवेश और बिजनेस विस्तार की योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
- मजबूत आर्थिक विकास: एसोचैम ने उम्मीद जताई है कि वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल और अस्थिरता के बावजूद, मौजूदा वित्तीय वर्ष में भारत का आर्थिक विकास मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा।
- महंगाई पर लगाम: नीतिगत दरों को स्थिर रखकर आरबीआई ने विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
क्या होता है आम जनता और उद्योग पर असर?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई व्यावसायिक बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी न होने का सीधा मतलब है कि बैंकों पर लोन की ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं होगा। इससे होम लोन, कार लोन और कॉर्पोरेट लोन लेने वाले उपभोक्ताओं व कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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