drnewsindia.com /नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) और विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया। नड्डा ने कहा कि किसी बात को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाती और सच्चाई को पराजित नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी को नड्डा की सीधी चुनौती
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा, “राहुल गांधी, कान खोलकर सुन लीजिए, झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता, सच पराजित नहीं हो जाता।” नड्डा के इस बयान को विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित कई सवाल उठाए जाते रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर राजनीतिक भ्रम पैदा करने का आरोप लगा रही है। दोनों पक्षों के बीच यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा है।
राहुल गांधी, केजरीवाल, अखिलेश और ममता पर निशाना
नड्डा ने अपने बयान में केवल राहुल गांधी को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं का नाम लेते हुए उन पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने राहुल गांधी के अलावा अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का भी उल्लेख किया।
नड्डा ने इन नेताओं और उनके राजनीतिक रुख को ‘टूलकिट मानसिकता’ से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेता संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसी राजनीति देश की प्रगति में बाधा डालती है।
फिलहाल, जेपी नड्डा के बयान ने SIR और ‘वोट चोरी’ विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा जहां विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष अपनी ओर से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाता रहा है। इस पूरे विवाद में अंतिम रूप से महत्वपूर्ण बात यही रहेगी कि मतदाता सूची से जुड़े तथ्य, आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्धारित चुनावी प्रक्रियाएं क्या कहती हैं।




