पालोजोरी में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र का मामला, 46 आवेदकों को नोटिस

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झारखंड के पालोजोरी प्रखंड क्षेत्र से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया से जुड़ा एक मामला सामने आया है। उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय जमुआ बसहा स्थित बूथ संख्या-251 से संबंधित 46 आवेदकों पर कथित रूप से फर्जी या एडिटेड प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का प्रयास करने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद प्रखंड प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी 46 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जमुआ बसहा बूथ से जुड़ा है मामला

मामला पालोजोरी प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय जमुआ बसहा स्थित मतदान केंद्र संख्या-251 से जुड़ा बताया गया है। मतदाता सूची में नाम चढ़वाने के लिए आवेदन करने वाले 46 लोगों के दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई है।

जानकारी के अनुसार, इन आवेदकों ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान जाति प्रमाण-पत्र और निवासी प्रमाण-पत्र जमा किए थे। जांच के दौरान इन प्रमाण-पत्रों में एडिटिंग किए जाने का संदेह सामने आया। दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को आगे की जांच के लिए गंभीरता से लिया।

मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने से पहले संबंधित आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा होता है। इसी सत्यापन के दौरान दस्तावेजों पर सवाल उठने के बाद संबंधित आवेदकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

जाति और निवासी प्रमाण-पत्र की जांच

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद का केंद्र उन जाति और निवासी प्रमाण-पत्रों को लेकर है, जिन्हें मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आवेदन के साथ प्रस्तुत किया गया था। प्रशासन को इन दस्तावेजों के एडिटेड होने की जानकारी मिली है।

किसी सरकारी प्रक्रिया में जमा किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों की प्रामाणिकता महत्वपूर्ण होती है। यदि जांच में किसी दस्तावेज में छेड़छाड़ या गलत जानकारी की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रक्रिया के तहत प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल इस मामले में 46 लोगों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा गया है।

तीन दिन में देना होगा जवाब

प्रखंड प्रशासन ने संबंधित 46 आवेदकों को तीन दिनों के भीतर उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। अब प्रशासन की अगली कार्रवाई उनके स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करेगी।

यदि संबंधित लोग अपने प्रमाण-पत्रों की वैधता साबित करने वाले मूल दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, तो प्रशासन उनकी जांच करेगा। वहीं, यदि दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है और संबंधित आवेदकों को अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और संबंधित आवेदनों पर अंतिम निर्णय क्या लिया जाता है।

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