Gold-Silver Price: सस्ता सोना-चांदी खरीदने का मौका निकलता दिखा, बाजार में फिर तेजी; रिकॉर्ड हाई से अब भी काफी नीचे भाव

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नई दिल्ली। दिवाली और धनतेरस के आसपास सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सराफा बाजार से लगातार उतार-चढ़ाव वाली खबरें सामने आ रही हैं। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे संकेतों के बाद सोने-चांदी में दोबारा तेजी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। इसी वजह से जिन ग्राहकों को उम्मीद थी कि कीमतें और नीचे आने पर खरीदारी करेंगे, उन्हें अब बाजार की चाल पर फिर से नजर रखनी पड़ रही है।

हालांकि, इस तेजी को पूरी तरह से कीमतों की वापसी कहना अभी जल्दबाजी होगी। सोना और चांदी अपने इस साल के रिकॉर्ड स्तर से अब भी काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। हालिया बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर को घरेलू बाजार में सोने और चांदी के वायदा भाव में कमजोरी रही, जबकि 4 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने मजबूती दिखाई। इससे साफ है कि बुलियन बाजार में फिलहाल तेजी और गिरावट दोनों के संकेत मौजूद हैं।

सोने-चांदी में फिर क्यों बढ़ी हलचल?

सोने और चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का सीधा असर पड़ता है। अमेरिकी डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों की संभावनाएं, महंगाई, वैश्विक राजनीतिक तनाव और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कारक इन धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं।

4 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में तेजी दर्ज की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सोना करीब 2.4 प्रतिशत बढ़कर 4,021.68 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट को इस तेजी के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया। हालांकि, घरेलू वायदा बाजार में शुरुआती कारोबार के आंकड़े अपेक्षाकृत मिले-जुले रहे। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर भारतीय बाजार में कितना टिकेगा, यह आगे के कारोबार पर निर्भर करेगा।

अमेरिकी डॉलर कमजोर होने से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य देशों की मुद्राओं में सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग को सहारा मिलने की संभावना रहती है।

4 नवंबर को अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखने को मिली। बाजार रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के साथ यह करीब 101.5 के स्तर के आसपास पहुंचा। डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में नरमी ने सोने की कीमतों को समर्थन दिया। हालांकि, डॉलर में उतार-चढ़ाव के साथ ही भारतीय रुपये की स्थिति भी घरेलू सोने के भाव को प्रभावित करती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में कीमतें भी उतनी ही तेजी से बढ़ेंगी।

रिकॉर्ड हाई से अब भी काफी सस्ता है सोना-चांदी

हालिया गिरावट के बावजूद सोना और चांदी अपने इस साल के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे हैं। नवंबर की शुरुआत में आई गिरावट के दौरान सोने का वायदा भाव करीब 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास और चांदी का भाव करीब 1.79 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंचा था। इसके मुकाबले जनवरी में दोनों धातुओं ने काफी ऊंचे स्तर देखे थे।

एक बाजार रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में एमसीएक्स पर सोना करीब 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग 4.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी। इन स्तरों की तुलना में बाद की कीमतों में बड़ी कमी आई है। अलग-अलग कारोबारी अनुबंधों और बाजार स्रोतों के आधार पर रिकॉर्ड स्तर तथा मौजूदा भाव में अंतर हो सकता है। इसलिए रिकॉर्ड हाई से गिरावट का आकलन करते समय समान बाजार और समान शुद्धता के आंकड़ों की तुलना करना जरूरी है

घरेलू मांग और त्योहारों का असर

भारत में सोने और चांदी की खरीदारी का त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों से गहरा संबंध है। धनतेरस, दिवाली, शादी-विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर आभूषणों तथा चांदी के उत्पादों की मांग बढ़ती है। लेकिन जब कीमतें ऊंचे स्तर पर होती हैं, तो आम खरीदार खरीदारी की मात्रा कम कर सकते हैं या बाजार में गिरावट का इंतजार करते हैं।

इस साल ऊंची कीमतों के कारण घरेलू आभूषण मांग पर दबाव की आशंका जताई गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2026 के दौरान सोने की मांग छह साल के निचले स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। महंगे भाव के चलते ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, त्योहारों और शादी के सीजन में जरूरत के मुताबिक खरीदारी जारी रहने की संभावना बनी रहती है।

खरीदारी से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

सोना या चांदी खरीदने से पहले केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला करना सही नहीं है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को हॉलमार्क, शुद्धता, वजन, बिल और मेकिंग चार्ज की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।

फिलहाल सोने-चांदी के बाजार में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों और त्योहारों की मांग का असर दिखाई दे रहा है। रिकॉर्ड स्तर से कीमतों में बड़ी गिरावट जरूर आई है, लेकिन हालिया तेजी ने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सोना और चांदी इस तेजी को बरकरार रख पाते हैं या फिर बाजार में एक बार फिर गिरावट लौटती है।

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