नई दिल्ली। फेफड़ों के एक गंभीर और तेजी से फैलने वाले कैंसर के इलाज में नए शोध से उम्मीद जगी है। अमेरिकी दवा कंपनी एमजेन की दवा इमडेल्ट्रा और एस्ट्राजेनेका की इम्यूनोथेरेपी दवा इमफिन्जी को एक साथ देने से मरीजों के जीवित रहने की अवधि में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। अध्ययन के अनुसार, दोनों दवाओं के संयोजन से केवल इमफिन्जी लेने वाले मरीजों की तुलना में मृत्यु का खतरा 58 प्रतिशत तक कम हुआ।
यह अध्ययन एक्सटेंसिव-स्टेज स्मॉल सेल लंग कैंसर (Extensive-Stage Small Cell Lung Cancer) से पीड़ित मरीजों पर किया गया। यह फेफड़ों के कैंसर का एक आक्रामक प्रकार है, जिसमें बीमारी तेजी से फैल सकती है और उपचार करना चुनौतीपूर्ण होता है। अध्ययन में कुल 563 मरीजों को शामिल किया गया। सामने आए परिणामों के अनुसार, दोनों दवाओं का संयोजन लेने वाले मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि 21.1 महीने रही, जबकि केवल इमफिन्जी लेने वाले मरीजों में यह अवधि 12.7 महीने दर्ज की गई।
अध्ययन में क्या सामने आया?
अध्ययन के परिणामों में दोनों उपचार समूहों के बीच जीवित रहने की अवधि में अंतर देखा गया। इमडेल्ट्रा और इमफिन्जी का संयोजन लेने वाले मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि 21.1 महीने रही। इसके मुकाबले केवल इमफिन्जी लेने वाले मरीजों में औसत अवधि 12.7 महीने थी।
इस तरह दोनों समूहों के बीच औसत जीवित रहने की अवधि का अंतर 8.4 महीने रहा। अध्ययन के अनुसार, संयोजन उपचार से मृत्यु का खतरा केवल इमफिन्जी लेने की तुलना में 58 प्रतिशत तक कम हुआ।
यहां यह समझना जरूरी है कि मृत्यु के खतरे में 58 प्रतिशत की कमी का अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज की मृत्यु की संभावना 58 प्रतिशत कम हो जाएगी या सभी मरीजों को समान लाभ मिलेगा। इस तरह के चिकित्सकीय अध्ययनों में जोखिम में कमी आम तौर पर अध्ययन के दौरान दोनों समूहों के परिणामों की सांख्यिकीय तुलना पर आधारित होती है।
एक साल बाद जीवित रहने वाले मरीजों का अनुपात भी अधिक
अध्ययन का एक अन्य महत्वपूर्ण परिणाम एक साल बाद जीवित रहने वाले मरीजों के अनुपात से जुड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, इमडेल्ट्रा और इमफिन्जी का संयोजन लेने वाले लगभग 80 प्रतिशत मरीज एक साल बाद जीवित थे। वहीं, केवल इमफिन्जी लेने वाले मरीजों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत रहा।
इस अंतर से पता चलता है कि अध्ययन में संयोजन उपचार लेने वाले समूह में एक साल की जीवित रहने की दर बेहतर रही। कैंसर के उपचार में ऐसे परिणाम महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि डॉक्टर और शोधकर्ता केवल ट्यूमर पर उपचार के प्रभाव को ही नहीं, बल्कि मरीजों की जीवित रहने की अवधि और लंबे समय के परिणामों को भी देखते हैं।
हालांकि, अध्ययन में शामिल मरीजों की निगरानी अभी जारी है। आगे के अनुवर्ती परिणामों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि उपचार का लाभ कितने समय तक बना रहता है और इसके दीर्घकालिक प्रभाव क्या हैं।
क्या है एक्सटेंसिव-स्टेज स्मॉल सेल लंग कैंसर?
स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़ों के कैंसर का एक ऐसा प्रकार है, जो आम तौर पर तेजी से बढ़ने और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसके उपचार में बीमारी के चरण, कैंसर के फैलाव और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।
एक्सटेंसिव-स्टेज स्मॉल सेल लंग कैंसर में बीमारी फेफड़ों के उस हिस्से से आगे फैल चुकी होती है, जहां तक सीमित उपचार करना संभव हो। इस चरण में उपचार का उद्देश्य बीमारी को नियंत्रित करना, लक्षणों को कम करना, जीवन की गुणवत्ता बनाए रखना और मरीज की जीवित रहने की अवधि बढ़ाना हो सकता है।
इस प्रकार के कैंसर में उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं और बीमारी के दोबारा बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए ऐसे उपचारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है, जो मरीजों को अधिक समय तक लाभ दे सकें।
इमफिन्जी की क्या भूमिका है?
इमफिन्जी एस्ट्राजेनेका की इम्यूनोथेरेपी दवा है, जिसका सक्रिय घटक डुर्वालुमैब (Durvalumab) है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रतिक्रिया देने में मदद करने वाली उपचार पद्धति से संबंधित है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन मरीजों का कैंसर शुरुआती कीमोथेरेपी के बाद नहीं बढ़ता, उनके आगे के उपचार में इमफिन्जी का इस्तेमाल वर्तमान मानक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बीमारी को नियंत्रित रखने और उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करना है।
हालांकि, हर मरीज के लिए उपचार का विकल्प एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर कैंसर के प्रकार, बीमारी के चरण, पहले दिए गए उपचार और मरीज की शारीरिक स्थिति के आधार पर दवा चुनते हैं।
अध्ययन में 563 मरीजों को शामिल किया गया और शुरुआती परिणामों में संयोजन उपचार के साथ बेहतर जीवित रहने की अवधि सामने आई। मरीजों की निगरानी जारी रहने के कारण भविष्य में इसके दीर्घकालिक लाभ और सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।
किसी भी कैंसर उपचार के मूल्यांकन में प्रभावशीलता के साथ दुष्प्रभाव, उपचार सहन करने की क्षमता, जीवन की गुणवत्ता और विभिन्न प्रकार के मरीजों में मिलने वाले परिणामों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस अध्ययन के उपलब्ध विवरण में इन सभी पहलुओं की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए इनके बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भारत सहित दुनिया भर में कैंसर के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए उपचारों और दवाओं पर लगातार शोध किया जा रहा है। हालांकि, इस अध्ययन के परिणामों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि दोनों दवाओं का संयोजन भारत में सभी मरीजों के लिए स्वीकृत, उपलब्ध या उपयुक्त है। इसके लिए संबंधित नियामकीय मंजूरी और स्थानीय चिकित्सा दिशानिर्देशों की जानकारी आवश्यक है।






