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कानूनी डेस्क : देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने बिहार के मुजफ्फरपुर में चार दशक पहले हुए एक दिल दहला देने वाले नरसंहार मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1983 में हुए इस पांचहरे हत्याकांड के दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस घटना की क्रूरता ‘न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर देती है।’
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने साफ लफ्जों में कहा कि निचली अदालत और पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) दोनों का फैसला बिल्कुल सही था। इस तरह के जघन्य अपराध में दोषियों के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति या नरमी बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है।

क्या था पूरा मामला? (होली के दिन हुआ था तांडव)
सर्वोच्च अदालत ने मामले की भयावहता का जिक्र करते हुए बताया कि यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना मार्च 1983 में मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव में हुई थी।
- होली के दिन हमला: जब पूरा देश होली के त्योहार के जश्न में डूबा था, तब घातक हथियारों से लैस कम से कम 58 लोगों की एक उग्र भीड़ ने चंद्र शेखर चौधरी के घर को चारों तरफ से घेर लिया।
- जिंदा जलाने की कोशिश: भीड़ ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए चौधरी के घर में आग लगा दी।
- 5 लोगों की निर्मम हत्या: इस भयानक अग्निकांड और हमले में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पटना हाई कोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती
इस मामले में निचली अदालत ने दोषियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी। इसके बाद अगस्त 2017 में पटना उच्च न्यायालय ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए सजा को बरकरार रखा था।
दोषियों ने पटना हाई कोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी खारिज कर दिया है और साफ कर दिया है कि इन अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।





