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साइंस एंड टेक डेस्क : अंतरिक्ष की दुनिया में महाशक्तियों के बीच ‘मून रेस’ (Moon Race) अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने चंद्रमा की सतह पर अपना स्थायी ठिकाना (Base) बनाने के लिए एक बड़ा ब्लूप्रिंट जारी किया है। नासा ने चांद पर भेजे जाने वाले अपने एडवांस रोबोटिक लैंडर्स, हवा में उछलने वाले ‘हॉपिंग ड्रोन्स’ (Hoppping Drones) और अन्य अत्याधुनिक वाहनों का विवरण दुनिया के सामने रख दिया है।
इस मिशन के जरिए अमेरिका साल 2028 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कार्यकाल समाप्त होने से पहले एक बार फिर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर उतारना चाहता है।
$20 अरब का महाप्रोजेक्ट: चांद पर बनेगा ‘परमाणु और सौर ऊर्जा’ स्टेशन
नासा ने चांद को लेकर जो प्लान तैयार किया है, उसका बजट और तकनीक होश उड़ाने वाली है। नासा ने साल 2032 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर एक परमानेंट बेस बनाने के लिए 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) के भारी-भरकम कार्यक्रम की घोषणा की है।
- पावर सोर्स: चांद पर बनने वाला यह स्थायी अड्डा पूरी तरह से परमाणु (Nuclear) और सौर (Solar) ऊर्जा से संचालित होगा।
- किसे मिला जिम्मा: नासा ने इन सभी अत्याधुनिक मशीनों, लैंडर्स और ड्रोन्स का निर्माण करने के लिए दुनिया के दिग्गज बिजनेसमैन जेफ बेजोस की प्रसिद्ध अंतरिक्ष कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ (Blue Origin) को चुना है।

अमेरिका बनाम चीन: 2030 तक चांद पर इंसान भेजेगा ड्रैगन
नासा की इस जल्दबाजी के पीछे चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं हैं। दरअसल, चीन ने भी साल 2030 तक चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने (मानव मिशन) का आधिकारिक एलान कर रखा है। चीन को पछाड़ने और स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए अमेरिका अब 2028 तक ही अपने इंसानी मिशन को पूरा करने की जिद पर अड़ा है।
क्या खास होगा नासा के इस मिशन में? चांद की ऊबड़-खाबड़ सतह और अंधेरे वाले हिस्सों (क्रेटर्स) की जांच के लिए नासा विशेष रूप से ‘हॉपिंग ड्रोन’ का इस्तेमाल करेगा, जो उड़ने के साथ-साथ चांद की जमीन पर छलांग लगा सकेंगे। इसके अलावा भारी रोबोटिक गाड़ियां वहां इंसानों के रहने लायक कॉलोनी बनाने में मदद करेंगी।





