drnewsindia.com:भोपाल
राजधानी भोपाल के आईएसबीटी (ISBT) स्थित ‘राज होम्स’ मल्टीप्लेक्स और फैमिली एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े दो दशक पुराने विवाद में भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) को बड़ा कानूनी झटका लगा है। जिला न्यायालय ने बीडीए की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द करने की मांग की गई थी।
क्या था पूरा मामला?
- साल 2006 की शुरुआत: बीडीए ने आईएसबीटी क्षेत्र में मल्टीप्लेक्स और एंटरटेनमेंट कॉम्प्लेक्स विकसित करने के लिए टेंडर निकाला था।
- अनुबंध: ‘राज होम्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने सबसे ऊंची बोली लगाई और उन्हें 60 महीनों के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने का ठेका दिया गया।
- विवाद की जड़: समय सीमा बीतने के बाद बीडीए ने कंपनी पर निर्माण कार्य में देरी और अनुमतियाँ न लेने का आरोप लगाया। वहीं, कंपनी का तर्क था कि जमीन से जुड़ी वैधानिक अनुमतियों में देरी बीडीए के असहयोग के कारण हुई।

आर्बिट्रेटर ने क्या माना?
मामला आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल पहुँचा, जहाँ आर्बिट्रेटर ने कंपनी के पक्ष को सही ठहराया। ट्रिब्यूनल ने माना कि बीडीए की सहभागिता के बिना कंपनी स्वतंत्र रूप से बिल्डिंग परमिशन हासिल नहीं कर सकती थी, इसलिए देरी के लिए अकेले कंपनी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
कोर्ट का निर्णय: फैसला हस्तक्षेप योग्य नहीं
भोपाल जिला न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:
- कानूनी स्पष्टता: आर्बिट्रेटर के फैसले में कोई ऐसी कानूनी खामी नहीं है, जिसके आधार पर उसमें हस्तक्षेप किया जाए।
- BDA की प्रक्रिया: कोर्ट ने यह भी माना कि बीडीए लंबे समय तक भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं को स्वीकार करता रहा, इसलिए बाद में उसी आधार पर समझौता खत्म करना उचित नहीं था।
- न्यायालय का दायरा: अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपील की तरह तथ्यों की दोबारा समीक्षा नहीं कर सकती, क्योंकि आर्बिट्रेटर ने समझौते, लीज डीड और अन्य दस्तावेजों का पहले ही विस्तार से परीक्षण किया है।





