भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ी, 16 दिनों में घटा 8.2 किलो वजन

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drnewsindia.com

“मैं बाहर से कमजोर हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं।”

यह बात देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को बीबीसी से कही।

सोमवार सुबह जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 59 वर्षीय वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है। उनका ब्लड प्रेशर 107/70 और शुगर लेवल गिरकर 67 तक पहुंच गया है। उनकी बिगड़ती सेहत को देखकर समर्थकों की चिंताएं बढ़ गई हैं और हजारों लोग उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं। लेकिन वांगचुक अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने कहा, “मैंने जो शुरुआत की है, उसे तार्किक अंजाम तक ले जाना ही होगा।”

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नामक एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन द्वारा शुरू किया गया है, जो देश में शिक्षा सुधारों की मांग कर रहा है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह मांग मई की शुरुआत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) का पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के बाद उठी है।

  • प्रदर्शनकारियों का रुख: शिक्षा मंत्री को इस पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
  • सरकार का रुख: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और CJP व उनके समर्थकों को “देश की प्रगति में विश्वास न रखने वाले विघटनकारी तत्वों की बी-टीम” बताया है।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक पेशे से इंजीनियर, पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् हैं।

  • वह लद्दाख में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बनाए गए ‘आइस स्तूप’ (कृत्रिम ग्लेशियर) के आविष्कार के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।
  • उन्हें 2018 में एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाने वाला रमन मैगसेसे पुरस्कार मिल चुका है।
  • वर्ष 2009 की सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ (Three Idiots) का आमिर खान का किरदार (फुंसुख वांगडू) उन्हीं से प्रेरित था।
  • गांधीवादी विचारधारा को मानने वाले वांगचुक ने 29 जून को इस अनशन की शुरुआत की थी।

डॉक्टरों और समर्थकों की बढ़ती चिंता

दिल्ली की भीषण गर्मी (तापमान 38°C, लेकिन अहसास 46°C जैसा) के बीच सैकड़ों लोग वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर जुटे हुए हैं।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया, “भूख हड़ताल का आज 16वां दिन है। वांगचुक जी का शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया है। बैठने या खड़े होने पर उन्हें चक्कर आ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी उन्हें अनशन रोकने की सलाह दी है क्योंकि स्थिति गंभीर हो सकती है, लेकिन वह शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय होने तक रुकने को तैयार नहीं हैं।”

हैदराबाद से आए 29 वर्षीय इंजीनियर अनिमेष साहू और किसान सत्यप्रकाश भारद्वाज जैसे तमाम लोग उनकी सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं। वहीं, शिक्षाविद् प्रो. नंदिता नारायण ने भी उनसे अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई लंबी है और इस आंदोलन को जारी रखने के लिए उनका स्वस्थ रहना जरूरी है।

संसद मार्च की तैयारी

अभिजीत दिपके के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत को 24 दिन और वांगचुक की भूख हड़ताल को 16 दिन हो चुके हैं, लेकिन सत्ताधारी भाजपा (BJP) के किसी भी प्रतिनिधि ने अब तक उनसे संवाद करने की कोशिश नहीं की है।

दिपके ने कहा, “हम सिर्फ जवाबदेही मांग रहे हैं। अगर सरकार हमारे पास नहीं आ रही है, तो हम सरकार के पास जाएंगे।” प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया है कि आगामी 20 जुलाई को संसद सत्र के पहले दिन वे संसद भवन की ओर मार्च करेंगे और अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे।

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