बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को बालाघाट के बिरसा विकासखंड के जगला गांव पहुंचकर उन बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने बीमारी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बीच अपने बच्चों को खोया है। इस दौरान राहुल गांधी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पोषण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जब लोगों को सरकारी मदद की जरूरत होती है, तब सरकार नजर नहीं आती।
जगला गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मिले राहुल गांधी
राहुल गांधी गुरुवार को पड़ोसी महाराष्ट्र के गोंदिया से सड़क मार्ग के जरिए बालाघाट पहुंचे। उन्होंने बिरसा ब्लॉक के जगला गांव में प्रभावित बैगा आदिवासी परिवारों से बातचीत की और बच्चों की मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में कम से कम 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। विभिन्न रिपोर्टों में मौतों के संदर्भ में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, सांस संबंधी परेशानी और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का उल्लेख किया गया है।
राहुल गांधी ने मृत बच्चों के परिजनों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बच्चों की तबीयत कब खराब हुई, उन्हें किस तरह का इलाज मिला और परिवारों को सरकारी योजनाओं या आर्थिक सहायता का कितना लाभ मिला। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालांकि, मौतों की संख्या और कारणों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में अंतर भी सामने आया है, इसलिए अंतिम आधिकारिक स्थिति को सरकारी जांच और रिकॉर्ड के आधार पर देखना महत्वपूर्ण होगा।
‘सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम’
बालाघाट में राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। राहुल गांधी के अनुसार, बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण जैसी परिस्थितियों से जुड़ी है और सरकार को ऐसे इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने इस पूरे मामले को सरकारी विफलता बताया और कहा कि वह आदिवासी बच्चों की मौत तथा प्रभावित परिवारों की समस्याओं को संसद में उठाएंगे। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कई परिवारों को अब तक पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
राहुल गांधी ने आदिवासी इलाकों में केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का सवाल नहीं उठाया, बल्कि रोजगार और शिक्षा को भी इससे जोड़कर देखा। उनका कहना था कि यदि किसी क्षेत्र में परिवारों के पास रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है, तो इसका असर बच्चों और परिवारों की स्थिति पर पड़ता है।
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रभावित परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जांच, सरकारी सहायता की स्थिति और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में पोषण एवं चिकित्सा व्यवस्था को लेकर है। अलग-अलग पक्षों की ओर से आरोप और दावे सामने आ रहे हैं, ऐसे में आधिकारिक जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट से स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट होना महत्वपूर्ण रहेगा। बालाघाट की घटना ने एक बार फिर दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े सवालों को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है।




