स्कूल से घर लौटने के बाद चिप्स का पैकेट खाना, शाम को बिस्कुट या नमकीन लेना और कभी-कभार बर्गर या पिज्जा खा लेना आजकल बच्चों की सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। कई अभिभावक भी इन चीजों को कभी-कभार खाए जाने वाले सामान्य स्नैक्स के रूप में देखते हैं। लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड (Ultra-Processed Food) को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है। इस अध्ययन के मुताबिक, ऐसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों के दिमाग के उस हिस्से की प्रतिक्रिया से जुड़ा हो सकता है, जो इनाम, प्रेरणा और खाने की इच्छा से संबंधित है।
इस रिसर्च में पाया गया कि जो बच्चे अधिक मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, उनका दिमाग स्वादिष्ट भोजन की तस्वीरें देखने पर अधिक सक्रिय प्रतिक्रिया दिखा सकता है। इतना ही नहीं, दिमाग की इस प्रतिक्रिया का संबंध अगले एक साल में शरीर में वसा बढ़ने से भी देखा गया। यानी इन खाद्य पदार्थों का संबंध केवल वजन या मोटापे तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि खाने की इच्छा और मस्तिष्क की इनाम प्रणाली से भी जुड़ा हो सकता है।
क्या कहती है नई रिसर्च?
इस अध्ययन को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया (USC) के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन से जुड़े शोधकर्ताओं ने किया। इसमें ऐसे 46 बच्चों को शामिल किया गया, जिनका शुरुआती वजन सामान्य श्रेणी में था।
अध्ययन में बच्चों की औसत उम्र लगभग 8.7 वर्ष थी। इनमें 26 लड़कियां थीं, जो कुल प्रतिभागियों का लगभग 57 प्रतिशत थीं। शोधकर्ताओं ने बच्चों के खानपान, शरीर में वसा की मात्रा और मस्तिष्क की गतिविधियों का अध्ययन किया।
इसके लिए बच्चों से अलग-अलग समय पर उनके भोजन से जुड़ी जानकारी ली गई। साथ ही, फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (fMRI) तकनीक की मदद से यह देखा गया कि स्वादिष्ट भोजन की तस्वीरें देखने पर उनके दिमाग में किस तरह की प्रतिक्रिया होती है।
खाने की तस्वीरें देखकर दिमाग क्यों करता है ज्यादा प्रतिक्रिया?
रिसर्च में मस्तिष्क के डॉर्सल स्ट्रायटम (Dorsal Striatum) नामक हिस्से पर विशेष ध्यान दिया गया। यह दिमाग का ऐसा क्षेत्र है, जो इनाम, प्रेरणा, सीखने और किसी चीज को पाने की इच्छा से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उदाहरण के तौर पर, जब किसी बच्चे को चिप्स, चॉकलेट, बर्गर या किसी पसंदीदा खाने की तस्वीर दिखाई जाती है, तो उसके दिमाग में उस भोजन को पाने या खाने की इच्छा से जुड़ी गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं।
अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों के नियमित भोजन में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी अधिक थी, उनके डॉर्सल स्ट्रायटम में भोजन से जुड़ी तस्वीरों को देखकर अधिक सक्रियता दर्ज की गई।
हालांकि, दिमाग के वेंट्रल स्ट्रायटम नामक दूसरे हिस्से में ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला। इससे संकेत मिलता है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और मस्तिष्क की प्रतिक्रिया के बीच संबंध हर मस्तिष्क क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता।
एक साल में शरीर की चर्बी बढ़ने से भी मिला संबंध
इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष बच्चों के शरीर में होने वाले बदलावों से जुड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों के डॉर्सल स्ट्रायटम में खाने की तस्वीरों को लेकर अधिक प्रतिक्रिया थी, उनमें अगले एक साल के दौरान BMI और शरीर में वसा के प्रतिशत में बढ़ोतरी का संबंध देखा गया।
इसके अलावा, शुरुआत में अधिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने वाले बच्चों में एक साल बाद कमर के घेरे में अधिक वृद्धि का संबंध भी सामने आया।
शोध के अनुसार, दिमाग की प्रतिक्रिया और शरीर में वसा बढ़ने के बीच संबंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण था। जब शोधकर्ताओं ने दिमाग की इस प्रतिक्रिया को अपने विश्लेषण में शामिल किया, तो अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और BMI में बदलाव के बीच संबंध लगभग 31 प्रतिशत कम हो गया। शरीर में वसा के प्रतिशत से जुड़े संबंध में लगभग 44 प्रतिशत की कमी आई।
क्या होते हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिन्हें औद्योगिक स्तर पर कई प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। इनमें स्वाद, बनावट, रंग और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इनकी कुछ सामान्य श्रेणियों में शामिल हैं:
- पैकेट वाले चिप्स और नमकीन।
- इंस्टेंट नूडल्स और तैयार सूप।
- कुछ प्रकार के पैकेज्ड बिस्कुट और कुकीज।
- मीठे ब्रेकफास्ट सीरियल्स।
- पैकेट वाले मीठे पेय पदार्थ।
- कुछ प्रकार की पैकेज्ड ब्रेड और तैयार स्नैक्स।
- कई तरह के फास्ट फूड और औद्योगिक रूप से तैयार खाद्य पदार्थ।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लेकर सामने आई यह नई रिसर्च बच्चों के खानपान पर दोबारा विचार करने का महत्वपूर्ण संकेत देती है। अब तक ऐसे खाद्य पदार्थों को मुख्य रूप से वजन और मोटापे के नजरिए से देखा जाता था, लेकिन नए अध्ययन ने मस्तिष्क की इनाम प्रणाली और खाने की इच्छा से जुड़े संभावित संबंध को भी सामने रखा है।
अभिभावकों को बच्चों की डाइट में पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। कभी-कभार पसंदीदा स्नैक्स खाने के बजाय नियमित खानपान की आदतों पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। स्वस्थ भोजन, खेलकूद और संतुलित दिनचर्या बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद कर सकती है।





