मन की बात’ के 12 साल पूरे: पीएम मोदी ने स्वदेशी उत्पादों, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक को दिया बढ़ावा

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विजयादशमी पर शुरू हुए कार्यक्रम की यात्रा के 12 वर्ष पूरे, 50 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श, खादी की बढ़ती बिक्री और पारंपरिक फसलों को प्रोत्साहन का किया उल्लेख

drnewsindia/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के 12 वर्ष पूरे होने पर श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, समर्पण, सेवा भावना और असाधारण योगदान को सामने लाने का माध्यम रही है। कार्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में समाज और राष्ट्र के लिए काम कर रहे ऐसे लोगों की कहानियां सामने आई हैं, जिनके प्रयासों पर सामान्यतः अधिक ध्यान नहीं जाता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देश की लोकशक्ति को नमन करने का अवसर है। उन्होंने त्योहारों के मौसम में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के उपयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक कृषि को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

पंजाब में जैविक कपास और बुनकरी से महिलाओं को मिला रोजगार

प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में चल रही ‘नव-त्रिन्जन’ पहल का उल्लेख किया। खेती विरासत मिशन के माध्यम से यहां प्राकृतिक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल के तहत रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के बिना जैविक कपास उगाने और प्राकृतिक रंगों वाली कपास के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

इस पहल के अंतर्गत बुनकरी का प्रशिक्षण देने के लिए एक स्कूल भी शुरू किया गया है। इससे कई महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। प्रधानमंत्री ने रमनदीप कौर, रेखा रानी, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के बाद उन्होंने बुनकरी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। अब वे स्वदेशी जैविक कपास से शॉल, तौलिये और अन्य कपड़े तैयार कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक जरूरतों से जोड़ने के ऐसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ देश की हस्तकला और बुनकरी की विरासत को भी मजबूत कर रहे हैं।

हेवल नदी को बचाने के लिए ग्रामीणों ने चलाया अभियान

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी के संरक्षण के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों की भी प्रधानमंत्री ने सराहना की। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया।

इसके तहत वर्षा जल को रोकने, जमीन में पानी के पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए। इन पहलों से नदी को नया जीवन देने के साथ कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब समाज एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करता है, तो सकारात्मक बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने त्योहारों के दौरान आसपास स्वच्छता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल करने की अपील की।

‘वोकल फॉर लोकल’ से भारतीय उत्पादों को मिल रहे नए बाजार

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव तक पहुंचने का उदाहरण दिया।

उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार उत्पादों की पैकेजिंग का भी उल्लेख किया। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग में आदिवासी कला को शामिल किया गया है, जिसे जापान के प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री ने बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार करने वाले कर्नाटक के स्टार्टअप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता के साथ उनकी आकर्षक और उपयोगी पैकेजिंग भी बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खादी के बढ़ते बाजार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि गांधी जयंती पर एक ही दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों की खरीदारी में स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों को प्राथमिकता देने की अपील की।

ई-संजीवनी से 50 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के उपयोग पर प्रधानमंत्री ने ‘ई-संजीवनी’ योजना की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस माध्यम से अब तक करीब 50 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह प्राप्त करने में मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के एक बच्चे, लक्षद्वीप के कल्पेनी द्वीप के कुन्ही कोया, लद्दाख के जांस्कर की कुंजांग डोलमा और नागालैंड के पेरेन के एक बच्चे के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि ई-संजीवनी के माध्यम से स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से मार्गदर्शन मिला और मरीजों के उपचार में सहायता हुई।

उन्होंने कहा कि देश में लगभग 1 लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य जांच और टेली-परामर्श जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

आईआईटी मद्रास में मानव मस्तिष्क पर आधुनिक अनुसंधान

प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां मानव मस्तिष्क के अध्ययन के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्र में उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल त्रि-आयामी तस्वीरों के माध्यम से मस्तिष्क की संरचना को समझने और 100 मानव मस्तिष्कों की थ्री-डी मैपिंग करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अनुसंधान में परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने से अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों पर भविष्य में अनुसंधान के नए अवसर खुल सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना से जुटाए गए आंकड़ों को आगे विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की योजना है।

उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार द्वारा अंगदान का निर्णय लेने का उदाहरण भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंगदान से जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिलने के साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी सहायता मिल सकती है।

युवाओं के स्टार्टअप कर रहे नई तकनीकों पर काम

प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास के युवाओं और स्टार्टअप की ओर से विकसित किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। इनमें सोने की गुणवत्ता जांचने, बैंक धोखाधड़ी से निकाली गई रकम की वसूली में मदद करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में सहायता करने वाले समाधान शामिल हैं।

इसके अलावा समुद्र के ऊपर उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए तेजी से चार्ज होने वाली बैटरियों तथा रक्षा तकनीक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को सही वातावरण और सहयोग मिलने से उनकी प्रतिभा नए समाधान विकसित करने में सामने आ रही है।

उन्होंने भारतीय मूल के वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी को भी याद किया, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से उनके जीवन और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में पढ़ने तथा उनसे प्रेरणा लेने की अपील की।

मेघालय और नागालैंड में फिर बढ़ रही श्रीअन्न की खेती

प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज यानी श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने वाले पूर्वोत्तर भारत के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के आयोजन से लोगों में इन पारंपरिक फसलों के प्रति जागरूकता बढ़ी।

मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव में दो महिलाओं ने मोटे अनाज से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद तैयार करने की पहल की। इससे इन उत्पादों की मांग बढ़ी और किसानों को दोबारा मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहन मिला।

पश्चिम गारो हिल्स के सादोलपाड़ा गांव में किसान चेकजिंग संगमा ने आधुनिक तरीकों से मोटे अनाज की खेती शुरू की। वहीं, नागालैंड के केजोमा गांव में वर्ष 2024 में लंबे अंतराल के बाद इसकी खेती फिर शुरू हुई और वर्ष 2025 में पहला मोटा अनाज महोत्सव आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक फसलों को नए उत्पादों और बाजारों से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इससे कृषि विरासत को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

महर्षि वाल्मीकि और भाई परमानंद के योगदान को किया याद

प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके विचारों और रामायण की शिक्षाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने सेवा, करुणा, सामाजिक समरसता और निरंतर प्रयास का संदेश दिया। भगवान राम के जीवन में माता शबरी और निषादराज के प्रति सम्मान इन मूल्यों का उदाहरण है।

उन्होंने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी से जुड़े मंदिरों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास भारत की समावेशी परंपरा को मजबूत करते हैं।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद की 150वीं जयंती के संदर्भ में उनके योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि भाई परमानंद आर्य समाज से जुड़े रहे और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे तथा अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दी थी।

प्रधानमंत्री ने उनकी पुस्तक ‘आपबीती : काले पानी के कारावास की कहानी’ पढ़ने का आग्रह करते हुए युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और बलिदान से प्रेरणा लेने की अपील की।

रन फॉर यूनिटी में भाग लेने की अपील

प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘रन फॉर यूनिटी’ देश की एकता को मजबूत करने और राष्ट्र के प्रति संकल्प दोहराने का अवसर है।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने दिवाली, छठ महापर्व और अन्य त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना, पर्यावरण की रक्षा करना, नई तकनीक को उपयोगी बनाना और समाज के लिए योग

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